देवर भाभी Xxx कहानी में पढ़ें कि मेरे देवर मेरा बहुत ख्याल रखते हैं. मुझे वे अच्छे लगने लगे. मैंने उनको रिझाना शुरू कर दिया. देवर का लंड मेरी चूत में कैसे घुसा?


दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार.


मुझसे तो आप अच्छी तरह से वाकिफ हैं और मेरे जिस्म से भी. क्योंकि मेरी बहुत सारी सेक्स कहानी कामुकताज डॉट कॉम पर पहले ही प्रकाशित हो चुकी हैं.
मेरी पिछली कहानी थी: सहेली के पति ने मेरी चूत मार ली


मैं अक्षिता एक बार आपके सामने अपनी देवर भाभी Xxx कहानी लेकर फिर हाजिर हूं.
आज मैं आपको अपने … और अपने देवर के बारे में कुछ बताना चाहती हूं.


इस कहानी को सुनें.



हुआ यूं कि लॉक डाउन के चलते, मेरे देवर घर पर आ गए थे.
वैसे तो वे बाहर जॉब करते हैं लेकिन करोना की वजह से जो लॉकडाउन लगा … तो वे घर पर आ गए.


अबकी बार इंडिया में पूरी तरह से लॉकडाउन तो नहीं था, जरूरत के वक्त लोग बाहर आ-जा सकते थे … लेकिन फिर भी लॉकडाउन लगा हुआ था.


मेरी और मेरे देवर की काफी अच्छी पटती है. वे मेरा बहुत ख्याल रखते हैं. घर के काम में भी मेरी मदद करवाते हैं.
इन्हीं सब वजहों से ऐसे इंसान की तरफ़ मैं आकर्षित हो गई. मुझे वे अच्छे लगने लगे.


लेकिन मैं अपने दिल की बात उनसे कह नहीं पा रही थी तो मैंने घर में अपने देवर को रिझाना शुरू कर दिया.


घर में मैं ऐसे सूट पहनने लगी, जिसमें मेरे बूब्स के उभार थोड़ा दिखते थे.
मैं जानबूझकर उनके सामने बैठकर पौंछा लगाने लगी. जानबूझकर किसी ना किसी बहाने उनके सामने झुकने लगी जिससे मेरे बूब्स उनको साफ-साफ दिखने लगें.


शायद वे भी मेरी तरफ मेरे ऊपर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगे थे.
धीरे-धीरे मैं यह बात नोट करने लगी थी.


फिर जब एक दिन घर पर मेरे पति नहीं थे. वो कुछ सामान लेने बाजार गए थे.
हमारे यहां से बाजार बहुत दूर है, जहां जाकर वापस आने में टाइम लगता है.


तो मेरे देवर को मेरे पास आने का मौका मिल गया था.
वो मेरे पास आए और मुझसे बोले- भाभी, आप बहुत खूबसूरत हो.


मैं उनकी बात समझ गई थी. मैं एकाएक उनकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.


वो बोले- भाभी आप मुस्कुरा क्यों रही हैं. मैंने कुछ गलत कहा है क्या?
मैंने कहा- सही गलत की बात बाद में देखी जाएगी … अभी तो आप मुझे साफ़ साफ़ बताओ कि आप मेरी इतनी तारीफ़ क्यों कर रहे हो. आपको मुझसे क्या चाहिए?


देवर जी बोले- भाभी मैं कैसे कहूँ … मुझे समझ ही नहीं आ रहा है.
मैंने उनकी इस दयनीय हालत का मजा लेते हुए कहा- बताना तो पड़ेगा ही देवर जी. मैं तो आपकी भाभी हूँ आप मुझसे क्यों शर्मा रहे हो?


मेरी इस बात से मेरे देवर जी को शायद कुछ हिम्मत आई और उन्होंने कहा- भाभी, मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ. मगर आपको मेरी बात का बुरा लगे तो साफ़ कह देना. मन में बात न रखना.
मैंने कहा- ओके अब कहो भी!


देवर जी बोले- भाभी, आई लाइक यू.
मैंने कहा- यस … मैं भी आपको पसंद करती हूँ. मगर इसमें इतना शर्माने की क्या बात थी?


देवर जी बोले- भाभी, आई लव यू.
अब मैं कुछ मुस्करा दी.


इस पर देवर जी बोले- अब आप भी कुछ कहें न!
मैंने कहा- देवर जी, मेरी आंखों में आपको क्या दिखता है?


देवर जी ने मेरी आंखों में आंखें डालीं और उसी समय मैंने उनको नशीली निगाहों से देख कर अपने होंठ काट लिए.
ये मस्त इशारा था और मेरे देवर जी के लिए एक हरी झंडी सा था.


उन्होंने आगे बढ़ कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगे.


औरत की गर्दन, किस करने के लिए वे हिस्सा होती है … जहां वे अपने पार्टनर से हमेशा चाहती है कि वे वहां किस करें.
क्योंकि सबसे ज्यादा अच्छा किस करना उसे वहीं पर ही लगता है.


खैर … मैं उनसे कुछ भी नहीं कह पा रही थी और वे मुझे किस करते जा रहे थे.
फिर उन्होंने मुझे बेड पर लेटा लिया और मेरे होंठों को चूसने लगे.


कुछ ही देर बाद मैं भी उनका साथ देने लगी.


मैंने उनसे कहा- देवर जी, बड़ी देर से समझ पाए … मैं तो कबसे आपका प्यार पाने के लिए तरस रही थी.
ये सुनकर मेरे देवर जी ने कहा- हां भाभी, मुझे कुछ कुछ लगता तो था, जब अपनी हेडलाइट्स दिखाती थीं. मगर मैं हिम्मत नहीं कर पाता था.
मैंने कहा- अब तो सब कुछ खुल गया मेरे प्यारे देवर जी.


वो भी मेरे जिस्म की महक में खो गए और बोले- भाभी आज तो आपकी चटनी बना कर ही दम लूंगा.
मैंने भी कह दिया- हां मेरी जान, पीस कर रख दो मुझे … तुम्हारे भैया तो मुझे महीनों तक नहीं छूते हैं.


बस फिर क्या था. हम दोनों एक दूसरे में बिल्कुल खो गए थे. कपड़ों के ऊपर से ही एक दूसरे के बदन को महसूस कर रहे थे और हमारे होंठ एक दूसरे को किस कर रहे थे.


वे अन्दर तक अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दे रहे थे, मैं भी उनकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती थी.
मेरा जिस्म चुदाई के लिए बहुत भूखा था.


फिर वे मेरे कपड़े उतारने लगे. पहले उन्होंने मेरा कमीज उतारा … और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाने और चूसने लगे.
मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं.




फिर उन्होंने मेरी सलवार को उतार दिया. अब मैं उनके नीचे सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेटी थी.
मेरा गोरा जिस्म उनके सामने था, वे जितना चाहे उसे चूम-चाट सकते थे. उसके साथ कुछ भी कर सकते थे, जो वे कर भी रहे थे.


उन्होंने मुझे ऐसे दबा रखा था, जैसे वो मुझे अपने जिस्म के अन्दर समाना चाहते हों.


फिर उन्होंने धीरे-धीरे करके मेरी ब्रा और पैंटी को भी मेरे बदन से अलग कर दिया.
अब मैं देवर जी के सामने पूरी नंगी लेटी थी.


वे मेरे दोनों मम्मों से खेलने लगे, एक को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे और दूसरे को दबाने लगे. कुछ देर बाद दूसरे को मुँह में लेकर चूसा और पहले को मसलने लगे.


मैंने भी अपने दोनों दूध अपने देवर से खूब चुसवाए.


फिर वे मुझे किस करते हुए नीचे मेरी चूत तक चले गए और मेरी चूत को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे.


मेरी चूत से पानी पहले ही निकल रहा था.
उन्होंने मेरी चुत को चूसकर और चाटकर और भी गीला कर दिया.


जब मेरे देवर जी की जीभ मेरी चुत के दाने को लिकलिक करके गर्म कर रही थी तो मेरी चुत ये सह न सकी और उसने अपना झरना बहा दिया.
देवर जी मेरी सारी मलाई चाट गए और मेरी चुत को चूस चूस कर फिर गर्म कर दिया.


फिर वे मेरे ऊपर आ गए और सीधे अपना लंड मेरी चूत पर रख कर धीरे से एक धक्का लगा दिया.
उनका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.


मेरे मुँह से बहुत तेज आह निकल गई.
मैंने उनसे कहा- पूरा एकदम अन्दर डालने की क्या जरूरत थी … धीरे-धीरे करके डालते.
देवर जी मुझसे कहने लगे- भाभी, मुझे आपको अपने लंड का अहसास कराना था.


मैंने उनकी कोली भर ली और वो मुझे चोदने लगे.
मेरी चूत में देवर जी का लंड अन्दर बाहर हो रहा था.


सच बताऊं तो मुझे अपने देवर के लौड़े से चुदने में बहुत मजा आ रहा था.
उन्होंने मेरे जिस्म को अपने आगोश में ले रखा था.


मुझे चोदते चोदते वे मेरे जिस्म को खूब चूम और चाट रहे थे. कभी मेरे होंठों को अपने मुँह में लेकर चूसते … तो कभी मेरे कान की लटकन को चूसते.
फिर मेरी गर्दन और मेरे बूब्स को खूब दबाते हुए मुझे तेज तेज धक्के देने लगते.


बहुत देर तक ऐसे ही चुदाई होने के बाद मेरा पानी निकलने लगा तो वे मेरी चूत में और तेज तेज धक्के लगाने लगे.


मैं भी उनसे जोर जोर से कहने लगी- आह और जोर से चोदो बेबी … और जोर से चोदो.


तभी मेरा शरीर अकड़ने लगा. मैं अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पाई. मैंने उनकी कमर पर अपने नाखून भी गड़ा दिए और मैं झड़ गई.
मैंने अपने अन्दर की एक-एक बूंद बाहर निकाल दी.


मुझे ऐसे झड़ता देख देवर जी मुझसे कहने लगे- भाभी, आप तो बहुत गर्म माल हो.
मैंने उनसे कहा- अब यह सब बात छोड़ो … और जल्दी जल्दी करो. तुम्हारे भैया आने वाले होंगे.


वे फिर से मुझे चोदने लगे और कुछ ही देर में उनका भी पानी निकल गया.
देवर जी अपने लंड का सारा पानी मेरी चूत में निकाल दिया और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया.


मैंने उनसे कहा- तुमने यह क्या किया … मैं प्रेग्नेंट हो गई तो!
देवर जी मुझसे कहा- कोई बात नहीं भाभी … मैं आपको मेडिसिन लाकर दे दूंगा.


उस दिन इससे ज्यादा और कुछ नहीं हुआ क्योंकि हमारे पास बहुत कम टाइम था और एक अन्दर डर भी था कि कहीं कोई आ ना जाए.


फिर धीरे-धीरे ऐसे ही चलता रहा. जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम एक दूसरे को किस कर लेते और जहां तक संभव होता देवर भाभी एक दूसरे के जिस्म के साथ खूब Xxx खेल लेते.


लेकिन सेक्स तक फिर दोबारा बात नहीं गई. क्योंकि घर में हमेशा कोई ना कोई मौजूद होता था.


मेरी जिंदगी का असली वाकिया तो अभी होना बाकी था.


कुछ समय बाद मेरे देवर का एक दोस्त घर पर आने लगा.
वह दो-तीन दिन में एक बार आ जाता था. वो दोनों बहुत ज्यादा टाइम एक साथ बिताने लगे थे.


फिर कुछ दिनों के बाद मैंने नोटिस किया कि उनका वे दोस्त मुझे दूसरी ही नजरों से देखने लगा.
मुझे अन्दर ही अन्दर ऐसा महसूस हुआ कि मेरे देवर और मेरे बीच में जो कुछ हुआ, उन्होंने शायद वे उसे बता दिया था और अब वे भी मेरे साथ इंजॉय करना चाहता था.


उसके जाने के बाद मैंने अपने देवर से इस बारे में बात की, तो उन्होंने मुझसे कहा- भाभी, उसका नाम रोहित है. वो आपको बहुत पसंद करता है, इसलिए ही वो यहां पर बार-बार आता है.


मैंने उनसे पूछा- और तुमने उसे मेरे और अपने बारे में सब कुछ बता दिया?
तो देवर जी ने मुझसे कहा- हां मैंने बता दिया.


उनकी यह बात मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आई और मुझे बहुत गुस्सा आया.


मेरे देवर ने मुझसे कहा- भाभी भरोसा रखो … यह मैंने आपकी खुशी के लिए ही किया है. मैं आपको जिंदगी में हर तरह का सुख देना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि हम एक ही समय में हम दोनों आपको खूब प्यार करें. आप भरोसा रखो हम आपको कोई तकलीफ नहीं होने देंगे. वे मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और वे बहुत अच्छा इंसान भी है.


मुझे उस वक्त उनकी बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थीं.
मैंने उनसे कहा- प्लीज मुझे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दो.


वे मेरे रूम से चले गए.


एक-दो दिन बाद जब मैं नॉर्मल हो गई तो देवर जी फिर से मेरे पास आए और मुझसे इस बारे में बात करने लगे.


इस बीच मैंने भी इस बारे में थोड़ा सोचा था … तो मुझे भी दो मर्दों के बीच में रोमांस करने का एक अनुभव लेने का मन हो गया था.
और कुछ मेरे देवर की बातें ही मुझे अन्दर से कामुक कर रही थीं. इसी वजह से मैं भी उनके रंग में ढल गई.


दोस्तो, देवर भाभी Xxx कहानी के अगले भाग में मैं आपको एक साथ दो लंड अपनी चुत गांड में लेने वाली चुदाई की कहानी लिखूंगी. आप मुझे मेल करना न भूलें.


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देवर भाभी Xxx कहानी जारी है.


इस कहानी का अगला भाग: देवर और उसके दोस्त ने मेरी चूत गांड मार ली-2